Ved, Maharshi Dayanand aur Bharatiya Samvidhan (वेद, महर्षि दयानंद और भारतीय संविधान) (in Hindi)
Rakesh Kumar Dr. Arya
Synopsis "Ved, Maharshi Dayanand aur Bharatiya Samvidhan (वेद, महर्षि दयानंद और भारतीय संविधान) (in Hindi)"
वेद सृष्टि का आदि संविधान है। उसकी व्यवस्था का पालन करना ही धर्म का पालन करना है। वेद की व्यवस्था ही विधि कही जा सकती है। विधि को ही कानून और धर्म की संज्ञा दी जाती है। जो विधि का पालन नहीं करता वह धर्म का पालक नाहीं हो सकता। स्वामी दयानंद जी महाराज ने वेद की व्यवस्था के अनुकूल ही संसार को मार्ग दिखाने का कार्य किया। स्वामी जी महाराज ने प्रत्येक ग्रंथ की वैज्ञानिक और वैदिक व्याख्या पर बल दिया। वह राजनीति के क्षेत्र में भी वेद और मनुस्मृति को ही आदर्श मानकर चलते थे। सम्प्रदायों की विखण्डनकारी मानसिकता को समाप्त करना स्वामी दयानंद जी महाराज का उद्देश्य था। वह 'पन्थ निरपेक्ष धर्मानुकूल शासन' की स्थापना करने के पक्षधर थे। ऐसा शासन ही लोकल्याणकारी शासन होता है। यह तो भारत वर्ष का दुर्भाग्य रहा कि यहाँ 'पन्थ निरपेक्ष धर्मानुकूल शासन' की स्थापना का आदर्श 'धर्मनिरपेक्षता' की भेंट चढ़ गया, अन्यथा संविधान ने तो ऐसी व्यवस्था की नहीं है। 17 जुलाई 1966 को उत्तर प्रदेश के जनपद गौतमबुद्ध नगर (तत्कालीन बुलंदशहर) उत्तर प्रदेश के ग्राम महावड़ में जन्मे विद्वान लेखक डॉ. राकेश कुमार आर्य ने प्रस्तुत पुस्तक के माध्यम से यह तथ्य स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि संविधान को लेकर वेद और महर्षि दयानंद जी महाराज का मंतव्य क्या था ? और आज का संविधान उसे मंतव्य से कितनी दूर है ? अभी तक लगभग 90 पुस्तकें लिख चुके डॉ. राकेश कुमार आर्य का लेखन कार्य राष्ट्रवाद और वैदिक आदर्शों को लेकर रहा है। प्रस्तुत पुस्तक में भी डॉ आर्य ने वेद के राष्ट्र निर्माण योजना को ही स्पष्ट करने का प्रयास किया है। अपने वैदिक सिद्धांतों और आदर्शों को समझने के लिए पुस्तक निश्चय ही संग्रहणीय है।